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फुटपाथ से स्टेट सेकंड टॉपर तक का सफर! ट्यूशन के लिए मेडिकल स्टोर में किया काम, 500 में आया 478 अंक

जब हौसले बुलंद हों और इरादे फौलादी, तो गरीबी की दीवारें भी रास्ता छोड़ देती हैं। बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट 2026 के नतीजों में पूर्णिया के लक्की अंसारी ने इसे सच कर दिखाया है । जहाँ एक तरफ संसाधनों की कमी थी, वहीं दूसरी तरफ लक्की का अटूट संकल्प। नतीजा यह रहा कि उन्होंने आर्ट्स संकाय में 95.60% (478 अंक) लाकर पूरे बिहार में दूसरा स्थान (Rank 2) हासिल किया है ।

लक्की के पिता, मो. इम्तियाज, पूर्णिया में फुटपाथ पर घड़ी मरम्मत का काम करके परिवार पालते हैं। एक छोटे से कमरे के मकान में पाँच सदस्यों के साथ रहते हुए लक्की ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। संघर्ष इतना गहरा था कि आर्थिक तंगहाली के कारण लक्की को अपनी पढ़ाई के बीच 6 महीने तक एक मेडिकल स्टोर पर काम भी करना पड़ा, ताकि वह परिवार की मदद कर सके।

लक्की की यह सफलता किसी चमत्कार से कम नहीं है। उनकी माँ पम्मी अंसारी बताती हैं कि लक्की रोजाना 7 से 8 घंटे पढ़ाई करता था। घर में जगह की कमी और तंगहाली के बावजूद उसने कभी हार नहीं मानी। लक्की ने अपनी तैयारी के लिए:

  • कोचिंग और डिजिटल माध्यम: ऑफलाइन कोचिंग के साथ-साथ यूट्यूब का भरपूर सहारा लिया।
  • प्रेरणा: अपनी गरीबी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया ताकि भविष्य में परिवार के हालात बदल सकें।

“टॉपर बनने से जो इज्जत मिलती है, वह बहुत सुखद एहसास है। मेरे माता-पिता की आँखों में खुशी के आँसू देखकर मुझे अपनी मेहनत सफल लग रही है। यह मेरे लिए ईद का सबसे बड़ा तोहफा है।” — लक्की अंसारी (Rank 2, Arts)

महज एक अंक से स्टेट टॉपर (Rank 1) बनने से चूके लक्की अब शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। वह एक आदर्श शिक्षक बनना चाहते हैं ताकि शिक्षा के माध्यम से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों का भविष्य संवार सकें।

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