पटना। न्यूजस्टिच
बिहार के अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के मेधावी छात्रों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अब बिहार के छात्र भी भारत सरकार की ‘नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप’ (NOS) योजना का लाभ उठाकर सात समंदर पार मास्टर और पीएचडी की डिग्री हासिल कर सकेंगे। बिहार सरकार के एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान की विशेष पहल और केंद्रीय मंत्री से मुलाकात के बाद अब इस योजना को बिहार में भी हरी झंडी मिल गई है।
मंत्री लखेंद्र पासवान की मेहनत लाई रंग
लंबे समय से बिहार के छात्र इस महत्वपूर्ण योजना से वंचित थे। मंत्री लखेंद्र पासवान ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कर पुरजोर तरीके से मांग रखी थी कि बिहार के आर्थिक रूप से कमजोर एससी-एसटी छात्रों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए। केंद्र सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए योजना को बिहार में लागू करने की मंजूरी दे दी है।
किसे मिलेगा लाभ?
इस योजना के तहत चयन प्रक्रिया के लिए कुछ कड़े लेकिन पारदर्शी मानक तय किए गए हैं:
वार्षिक आय: छात्र के परिवार की कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
आयु सीमा: आवेदन करने वाले छात्र की अधिकतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए।
कुल सीटें: प्रति वर्ष लगभग 125 छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं।
महिला आरक्षण: कुल सीटों में से 30 सीटें विशेष रूप से महिला छात्राओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं।
सरकार उठाएगी सारा खर्च
चयनित होने वाले छात्रों को विदेश में रहने और पढ़ाई करने के लिए किसी वित्तीय बोझ की चिंता नहीं करनी होगी। योजना के तहत निम्नलिखित सुविधाएं मिलेंगी:
ट्यूशन फीस: विदेशी विश्वविद्यालय की पूरी फीस सरकार भरेगी।
मेंटेनेंस अलाउंस: रहने और खाने का वार्षिक खर्च।
वीजा और बीमा: वीजा फीस और मेडिकल इंश्योरेंस का खर्च।
हवाई टिकट: विदेश जाने और कोर्स पूरा होने पर वापसी का एयर टिकट।
मंत्री लखेंद्र पासवान ने कहा कि बिहार के एससी-एसटी समाज के जो बच्चे आर्थिक तंगी के कारण विदेश जाने का सपना भी नहीं देख पाते थे, अब उनके लिए रास्ते खुल गए हैं। यह योजना उनके सशक्तिकरण में मील का पत्थर साबित होगी।

