पटना । न्यूजस्टिच
बिहार की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। सूत्रों के हवाले से मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनने के प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया है। निशांत ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि वे “किसी भी सूरत में” डिप्टी सीएम का पद स्वीकार नहीं करेंगे।
मनाने की कोशिशें अब तक नाकाम
निशांत कुमार के इस कड़े रुख के बाद जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर खलबली मच गई है। बताया जा रहा है कि कल से ही जेडीयू के कद्दावर नेता और उनके सगे-संबंधी उन्हें समझाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। आज सुबह 11 बजे तक कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन निशांत अपने फैसले पर अडिग हैं। वे सत्ता और कुर्सी की राजनीति से खुद को दूर रखना चाहते हैं।
निशांत का जेडीयू में प्रवेश और राजनीति का सफर
निशांत कुमार लंबे समय तक राजनीति की चकाचौंध से दूर रहे हैं। उनके सक्रिय राजनीति में आने और जेडीयू में शामिल होने की चर्चाएं तब तेज हुईं जब पार्टी के भीतर उत्तराधिकारी को लेकर मंथन शुरू हुआ।
निशांत औपचारिक रूप से जेडीयू की सक्रिय सदस्यता और सांगठनिक गतिविधियों में जून 2024 के आसपास तब चर्चा में आए, जब पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान उन्हें आगे लाने की मांग उठी थी। हालांकि, उन्होंने हमेशा खुद को एक “आध्यात्मिक व्यक्ति” बताया है। यह पहली बार था जब नीतीश कुमार के बाद उनके परिवार से किसी के राजनीति में आने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसे समर्थकों ने ‘भविष्य का नेता’ मानकर स्वागत किया था।
जेडीयू के सामने वैकल्पिक चेहरे की चुनौती
अब सवाल यह है कि अगर निशांत तैयार नहीं होते, तो जेडीयू से डिप्टी सीएम कौन बनेगा? सूत्रों का कहना है कि पार्टी आज शाम तक किसी वैकल्पिक नाम पर फैसला ले सकती है। जेडीयू के सामने चुनौती एक ऐसे चेहरे को पेश करने की है जो नीतीश कुमार की विरासत को संभाल सके और गठबंधन के समीकरणों में फिट बैठ सके।
कल सिर्फ मुख्यमंत्री लेंगे शपथ!
ताजा अपडेट यह है कि अगर आज शाम तक निशांत कुमार को मनाने में कामयाबी नहीं मिली, तो कल होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में सिर्फ नए मुख्यमंत्री ही शपथ लेंगे। डिप्टी सीएम के पद को फिलहाल खाली रखा जा सकता है या बाद में किसी अन्य नाम पर मुहर लगाई जा सकती है। फिलहाल, पूरी बिहार इकाई की नजरें नीतीश कुमार के अगले कदम और निशांत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

