बिहार की राजनीति में एक बार फिर बुनियादी ढांचे और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर संग्राम छिड़ गया है। राजधानी पटना के जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (JPNI) के नवनिर्मित टर्मिनल भवन की दीवारों से टाइल्स गिरने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार और बीजेपी के खिलाफ तीखा हमला बोला है।
“भ्रष्टाचार का जीता-जागता प्रमाण”: तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव ने एक ट्वीट के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि चुनाव के चक्कर में आनन-फानन में इस अर्धनिर्मित टर्मिनल का उद्घाटन किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि:
“29 मई 2025 को प्रधानमंत्री ने जिस नए टर्मिनल का उद्घाटन किया, वहां अब टाइल्स गिरने लगी हैं। यह भ्रष्ट भाजपाई सिंडिकेट की लूट का बड़ा प्रमाण है। एनडीए नेता अपने वफादार ठेकेदारों के साथ मिलकर जनता की कमाई का बंदरबांट कर रहे हैं। शुक्र है कि टाइल्स किसी यात्री पर नहीं गिरी, वरना बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।”
पटना एयरपोर्ट: इतिहास और वर्तमान स्थिति
पटना का जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बिहार का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है। पुराने टर्मिनल पर बढ़ते दबाव को देखते हुए नए आधुनिक टर्मिनल की योजना बनाई गई थी।
- नए टर्मिनल का निर्माण: पटना एयरपोर्ट के विस्तारीकरण और नए टर्मिनल का काम पिछले कुछ वर्षों से जारी था। इसका लक्ष्य यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करना था।
- उद्घाटन: इस नए टर्मिनल परिसर का भव्य उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 मई 2025 को किया गया था।
- यात्रियों का दबाव: पटना एयरपोर्ट वर्तमान में सालाना 40 लाख से अधिक यात्रियों की आवाजाही को संभाल रहा है। नया टर्मिनल इसी क्षमता को बढ़ाने के लिए बनाया गया था।
- विमानों का परिचालन: वर्तमान में पटना एयरपोर्ट से रोजाना लगभग 80 से 100 विमानों (आगमन और प्रस्थान मिलाकर) का परिचालन होता है, जो इसे देश के व्यस्ततम हवाई अड्डों में से एक बनाता है।
सुरक्षा पर सवाल
उद्घाटन के महज एक साल के भीतर ही भवन के हिस्सों का गिरना इंजीनियरिंग और निगरानी विभाग की बड़ी विफलता मानी जा रही है। यात्रियों के बीच इस घटना को लेकर चिंता है, क्योंकि टर्मिनल के अंदर हर समय हजारों लोगों की भीड़ रहती है।
अब देखना यह है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी और संबंधित विभाग इस पर क्या सफाई देते हैं और क्या दोषी ठेकेदारों पर कोई कार्रवाई की जाती है या नहीं। विपक्ष इस मुद्दे को आगामी चुनावी सभाओं में जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है।

