पटना। न्यूजस्टिच
बिहार राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक समावेशी और अत्याधुनिक बनाने की दिशा में एनडीए सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने पटना में ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों और व्यक्तियों के लिए एक विश्वस्तरीय स्वास्थ्य केंद्र, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह जानकारी बिहार सरकार के सूचना एवं जन-संपर्क विभाग (IPRD Bihar) द्वारा जारी एक आधिकारिक पोस्टर के माध्यम से साझा की गई है।
ऑटिज्म से प्रभावित परिवारों के लिए नई उम्मीद
ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसके लिए विशेष देखभाल, थेरेपी और निरंतर चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। बिहार में अब तक इसके एकीकृत और अत्याधुनिक इलाज के लिए एक केंद्रीकृत सरकारी सुविधा का अभाव था। जिसके कारण मरीजों को अक्सर राज्य के बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता था। सरकार के इस फैसले से ऑटिज्म से प्रभावित हजारों बच्चों, व्यक्तियों और उनके परिवारों को एक नई उम्मीद और राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण इलाज की सुविधा मिलेगी। जारी तस्वीर में भी एक बच्चे के कंधे पर एक देखभाल करने वाला हाथ दिखाया गया है, जो इस पहल के मानवीय पहलू को दर्शाता है।
गर्दनीबाग में 4.55 एकड़ में होगा निर्माण
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए स्थल का चयन कर लिया गया है। यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राजधानी पटना के गर्दनीबाग इलाके में स्थापित किया जाएगा। इसके निर्माण के लिए 4.55 एकड़ की विशाल भूमि आवंटित की गई है। इस केंद्र के बनने से बिहार न केवल ऑटिज्म के इलाज में स्वावलंबी बनेगा, बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीजों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चिकित्सा केंद्र के रूप में उभरेगा। पोस्टर पर लगा CABINET DECISION का स्टैम्प इस परियोजना के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा केंद्र
इस केंद्र में ऑटिज्म के निर्माण से बीमारी के निदान, थेरेपी (जैसे ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी), व्यवहार विश्लेषण और पुनर्वास में सहायता मिलेगी। बता दें कि यह पहल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। इस सुविधा के शुरू होने से बिहार में मानसिक स्वास्थ्य और विशेष देखभाल की ज़रूरतों को पूरा करने में एक बड़ा बदलाव आएगा।

