राजधानी के चित्रगुप्त नगर स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन शोषण की पुष्टि होने के बाद बिहार राज्य महिला आयोग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष अश्वमेध देवी (अश्वमेध देवी ‘अप्सरा’) ने पटना जिलाधिकारी (DM) को पत्र लिखकर जिले के सभी निजी और सरकारी गर्ल्स हॉस्टल्स का पूरा ब्यौरा तलब किया है।
हत्या और सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल
जहानाबाद की रहने वाली इस छात्रा की मौत के बाद पटना की सड़कों पर छात्र संगठनों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है। शुरुआत में पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और हॉस्टल मालिक की गिरफ्तारी के बाद मामले ने ‘यौन शोषण और हत्या’ की दिशा में नया मोड़ ले लिया है। इस घटना ने पटना के रिहायशी इलाकों में बिना किसी रोक-टोक के चल रहे अवैध गर्ल्स हॉस्टल्स की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
महिला आयोग के पत्र की 3 बड़ी बातें
योग ने जिलाधिकारी को भेजे गए अपने सख्त पत्र में प्रशासन से तीन मुख्य बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है.
अवैध हॉस्टल्स का ब्यौरा: जिले में कितने गर्ल्स हॉस्टल निबंधित (Registered) हैं और कितने बिना लाइसेंस के अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं?
सुरक्षा मानक: क्या हॉस्टल्स में CCTV कैमरे, अनिवार्य महिला वार्डन और महिला सुरक्षाकर्मी तैनात हैं?
7 दिनों का अल्टीमेटम: आयोग ने प्रशासन को केवल एक सप्ताह का समय दिया है, ताकि सभी हॉस्टल्स की विस्तृत सूची और सुरक्षा रिपोर्ट सौंपी जा सके।
क्या ‘डेथ ट्रैप’ बन गए हैं अवैध हॉस्टल्स?
पटना के मुन्नाचक, कंकड़बाग और बाजार समिति जैसे कोचिंग हब वाले इलाकों में हजारों छात्राएं हॉस्टल्स में रहकर भविष्य संवारने आती हैं। इस मामले में चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि जिस हॉस्टल में वारदात हुई, उसका मालिक आपराधिक इतिहास वाला था और वह उसी बिल्डिंग में रहता था। आयोग की यह पहल उन संचालकों पर नकेल कसने के लिए है जो नियमों को ताक पर रखकर छात्राओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

न्याय मिलने तक जारी रहेगी लड़ाई
महिला आयोग की अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दोषी या लापरवाह अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आयोग उन हॉस्टल्स को तुरंत बंद करने या उन पर कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश करेगा जो सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करते हैं।

