भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत हुई। इस वार्ता में दोनों वैश्विक नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया। हालांकि, इस बातचीत का सबसे अहम हिस्सा पश्चिम एशिया (West Asia) का मौजूदा तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा रहा।

रणनीतिक साझेदारी पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी बातचीत बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने कहा, “हमने विभिन्न क्षेत्रों में हमारे द्विपक्षीय सहयोग में हासिल की गई पर्याप्त प्रगति की समीक्षा की। हम सभी क्षेत्रों में अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
होर्मुज जलडमरूमध्य: भारत के लिए क्यों है अहम?
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को खुला और सुरक्षित रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है।
भारत के लिए यह रास्ता किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा करता है:
- कच्चा तेल (Crude Oil): भारत अपनी कुल तेल आयात का लगभग 60% से 65% हिस्सा खाड़ी देशों से मंगवाता है, जो इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
- एलएनजी (LNG): भारत की लगभग 50% से अधिक प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति इसी संकीर्ण समुद्री रास्ते पर निर्भर है।
वैश्विक ऊर्जा संकट का डर
अगर ईरान और इजराइल/अमेरिका के बीच तनाव के कारण यह रास्ता बाधित होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की इस चर्चा ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत और अमेरिका मिलकर इस जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाए रखेंगे।

