चेन्नई/पटना। न्यूजस्टिच
भारतीय राजनीति में एक कहावत मशहूर है रणनीति और रणभूमि में जमीन-आसमान का फर्क होता है। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) पर यह जुमला आज बिल्कुल सटीक बैठ रहा है। बिहार की राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत करते हुए जहां PK खुद जीरो पर आउट होते दिखे। वहीं सात समंदर पार तमिलनाडु में उनकी एक पुरानी भविष्यवाणी ने आज द्रविड़ राजनीति की चूलें हिला दी हैं।
नोट कर लो, विजय 118 पार जाएंगे
महीनों पहले एक इंटरव्यू के दौरान प्रशांत किशोर ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा था। विजय अगर अकेले चुनाव लड़ते हैं, तो वह 118 सीटें जीत सकते हैं, नोट कर लो। आज जब तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के रुझान सामने आ रहे हैं। थलापति विजय की तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) 94 से 100 सीटों के बीच अजेय बढ़त बनाए हुए है, तो PK के उस दावे को सोशल मीडिया पर राजनीतिक ब्रह्मवाक्य की तरह शेयर किया जा रहा है।
पर्दे के पीछे की रणनीति: PK का ‘विजय’ प्लान
सूत्रों की मानें तो विजय की इस ऐतिहासिक राजनीतिक एंट्री के पीछे प्रशांत किशोर की टीम का बड़ा हाथ रहा है। विजय के शुरुआती कैंपेन से लेकर उनकी पार्टी के गठन और अकेले चलो की रणनीति, सब कुछ PK की सलाह पर ही तैयार किया गया था। PK ने विजय को समझाया था कि अगर वे DMK या AIADMK के साथ गठबंधन करते हैं, तो उनकी अपनी पहचान जूनियर पार्टनर की बनकर रह जाएगी। विजय ने जोखिम लिया अकेले लड़े और आज नतीजा सबके सामने है।
रणनीतिकार बनाम राजनेता: PK की दोहरी छवि
यहां एक दिलचस्प विरोधाभास देखने को मिला है। प्रशांत किशोर एक सफल रणनीतिकार के रूप में फिर से स्थापित हो गए हैं। उन्होंने मोदी, ममता, जगन और अब विजय के लिए जो पिच तैयार की, उस पर बल्लेबाजों ने जमकर रन बनाए। लेकिन जब बात खुद की रणभूमि यानी बिहार की आई, तो PK का जादू नहीं चला। बिहार में ‘जन सुराज’ अभियान के जरिए खुद चुनावी मैदान में उतरने वाले PK को जनता ने वह रिस्पॉन्स नहीं दिया, जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है
स्ट्रेटजी बनाम स्ट्रगल: दूसरों के लिए बिसात बिछाना (Strategy) अलग काम है, लेकिन खुद मोहरा बनकर संघर्ष करना (Self-struggle) अलग।
तमिलनाडु का ‘वैक्यूम’: तमिलनाडु में जयललिता और करुणानिधि के बाद एक बड़े नेतृत्व का खालीपन था, जिसे विजय ने PK की मदद से भरा। बिहार में नीतीश और लालू जैसे पुराने चेहरों के बीच PK खुद को ‘विकल्प’ के रूप में पेश नहीं कर पाए।
क्या विजय बनेंगे मुख्यमंत्री?
PK की भविष्यवाणी 118 सीटों (बहुमत का आंकड़ा) की थी। वर्तमान में TVK जिस तरह 94 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, वह बहुमत से चंद कदम दूर है। अगर विजय इस आंकड़े को छू लेते हैं, तो यह न केवल विजय की जीत होगी, बल्कि प्रशांत किशोर के ‘स्ट्रेटजी ब्रांड’ की भी बड़ी वापसी होगी। कुल मिलाकर, तमिलनाडु के नतीजों ने सिद्ध कर दिया है कि PK दूसरों की नैया तो पार लगा सकते हैं, लेकिन खुद की नैया खेने के लिए उन्हें बिहार की मिट्टी की तासीर को और गहराई से समझना होगा। फिलहाल, तमिलनाडु में थलापति विजय की ‘आंधी’ ने स्टालिन के किले को ध्वस्त कर दिया है और PK की भविष्यवाणी सच के बेहद करीब खड़ी है।

