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पूर्णिया में नेताजी की हैवानियत! गर्भवती और उसके प्रेमी को दी तालिबानी सजा, खूंटे से बांधकर पीटा

बिहार के पूर्णिया जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने सुशासन के दावों और मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। जिले के कसबा थाना क्षेत्र की गुरही पंचायत में एक जनप्रतिनिधि ने ‘जज’ बनकर कानून को सरेआम हाथ में लिया और एक प्रेमी जोड़े को ऐसी सजा दी जिसे देख कर रूह कांप जाए।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो ने इलाके में सनसनी फैला दी है। वीडियो में वार्ड नंबर 9 के वार्ड सदस्य और उसके समर्थकों की बर्बरता साफ देखी जा सकती है। सत्ता के अहंकार में डूबे वार्ड सदस्य ने एक विवाहित महिला और उसके प्रेमी को बीच सड़क पर खूंटे से बांध दिया। इसके बाद शुरू हुआ लाठियों का वह खूनी खेल, जिसे देखकर वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की भीड़ मूकदर्शक बनी रही। भीड़ में से किसी ने भी उन असहायों को बचाने की हिम्मत नहीं दिखाई।

घटना की सबसे विचलित करने वाली सच्चाई यह है कि पीड़ित महिला दो महीने की गर्भवती है। समाज सुधार का ढोंग करने वाले वार्ड सदस्य और उसके गुर्गों ने महिला की नाजुक स्थिति का भी सम्मान नहीं किया। उसे पशुओं की तरह तब तक पीटा गया जब तक वह अधमरी नहीं हो गई। लाठियों की गड़गड़ाहट और जान की भीख मांगती महिला की चीखें मानवता को शर्मसार कर रही हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कसबा थानाध्यक्ष ज्ञान रंजन ने मोर्चा संभाला है। बताया गया कि डायल 112 के माध्यम से पुलिस को बंधक बनाए जाने की सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों को मुक्त कराया।

शुरुआत में डर और सामाजिक दबाव के कारण पीड़ितों ने कुछ भी बोलने से परहेज किया था, लेकिन जैसे ही मारपीट का वीडियो वायरल हुआ, पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया। थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि:

“कानून को हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं है। वायरल वीडियो के आधार पर वार्ड सदस्य और इस बर्बरता में शामिल सभी लोगों को चिन्हित किया जा रहा है। आरोपियों के खिलाफ ऐसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी।”

यह घटना सिर्फ एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी कुछ लोग खुद को संविधान से ऊपर समझते हैं। क्या एक वार्ड सदस्य को यह अधिकार है कि वह किसी की व्यक्तिगत जिंदगी का फैसला लाठियों से करे? गर्भवती महिला पर प्रहार करना न केवल अपराध है, बल्कि यह सभ्य समाज के माथे पर एक काला कलंक है।

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