गुजरात में साइबर अपराधियों के खिलाफ राजकोट ग्रामीण पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। ऑपरेशन म्यूल हंट के तहत पुलिस ने देशव्यापी स्तर पर फैले 1,500 करोड़ रुपये के विशालकाय साइबर फ्रॉड नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य कड़ी माने जा रहे एक आरोपी समेत तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद इस केस में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 9 पहुंच गई है।
तेलंगाना से जुड़े तार: कैसे काम करता था नेटवर्क?
राजकोट ग्रामीण जिले की साइबर सेल ने इस गिरोह के खिलाफ अपनी जांच तेज कर दी थी। पुलिस अधीक्षक (SP) विजयसिंह गुर्जर के अनुसार, हाल ही में पकड़े गए तीन आरोपियों में आदिलुद्दीन मोहम्मद सबसे अहम है, जो तेलंगाना का रहने वाला है।
आदिलुद्दीन का काम ‘म्यूल अकाउंट्स’ (किराए के बैंक खाते) का प्रबंधन करना था। वह इन खातों में धोखाधड़ी का पैसा ट्रांसफर करने और फिर आंगड़िया (पारंपरिक कूरियर सेवा) के माध्यम से नकदी वापस प्राप्त करने का काम संभालता था।
SP विजयसिंह गुर्जर ने बताया: गुजरात सरकार के निर्देश और उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में यह ऑपरेशन चलाया जा रहा है। पहले 6 आरोपी पकड़े गए थे, अब 3 और गिरफ्तार हुए हैं। आदिलुद्दीन इन फर्जी खातों और पैसों के लेनदेन की मुख्य कड़ी था।”
सिर्फ साइबर ठगी नहीं, GST और गेमिंग से भी कनेक्शन
पुलिस की गहराई से की गई जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह गिरोह सिर्फ साधारण साइबर ठगी तक सीमित नहीं था। इन ‘म्यूल अकाउंट्स’ का इस्तेमाल निम्नलिखित अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था:
- साइबर फ्रॉड: देशभर के लोगों से ठगा गया पैसा।
- अवैध गेमिंग: ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग ऐप का पैसा रोटेट करना।
- GST चोरी: जीएसटी से जुड़े फर्जी लेनदेन और इनवॉइस के जरिए करोड़ों की हेराफेरी।
क्या है ऑपरेशन म्यूल हंट?
गुजरात पुलिस द्वारा शुरू किया गया यह विशेष अभियान उन ‘बैंक खातों’ पर केंद्रित है, जिन्हें साइबर अपराधी गरीबों या अनजान लोगों से किराए पर लेते हैं। इन खातों में ठगी की रकम जमा की जाती है और फिर उसे तुरंत कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके। राजकोट ग्रामीण पुलिस की इस कार्रवाई ने साइबर अपराध की दुनिया के बड़े सिंडिकेट को बेनकाब किया है।

