बिहार में प्राकृतिक खेती का शंखनाद! 400 क्लस्टरों में शुरू हुई प्राकृतिक खेती, 800 कृषि सखियां तैनात

बिहार की राजधानी पटना स्थित बामेती (BAMETI) सभागार में शुक्रवार को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने किसानों से रसायनों का मोह छोड़कर पारंपरिक और प्राकृतिक खेती की ओर लौटने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘मिट्टी, पानी और इंसान’ के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अब रसायन मुक्त खेती समय की मांग है।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि वर्तमान में खेती में कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों का बेतहाशा प्रयोग हो रहा है। इसका सीधा असर न केवल हमारी जमीन की उपजाऊ शक्ति पर पड़ रहा है, बल्कि पीने का पानी भी दूषित हो रहा है। उन्होंने आगाह किया कि इन रसायनों के कारण मानव शरीर में गंभीर बीमारियां घर कर रही हैं। मंत्री ने कहा कि हमें अपने पूर्वजों वाली खेती की पद्धति को फिर से अपनाना होगा, जहां खाद के रूप में गोबर, कंपोस्ट और नीम का उपयोग होता था। इससे खेती की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।

कृषि मंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि प्राकृतिक खेती अपनाने पर सरकार उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगी। इसके लिए विशेष प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। साथ ही, प्राकृतिक उत्पादों को सही दाम दिलाने के लिए सरकार बेहतर बाजार व्यवस्था (Marketing) पर भी काम कर रही है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने सफल किसानों और कृषि सखियों को सांकेतिक चेक भी प्रदान किए, जिसकी राशि सीधे उनके बैंक खातों में DBT के माध्यम से भेजी गई है।

कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ किसानों को सचेत किया। उन्होंने बताया कि कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग से कैंसर जैसी घातक बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। आज शहर के लोग डर के कारण अपने गमलों में सब्जियां उगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती ही एकमात्र रास्ता है जो कृषि को टिकाऊ और लाभदायक बना सकती है।

कृषि निदेशक सौरभ सुमन यादव ने विभाग की उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि बिहार के सभी 38 जिलों में 400 क्लस्टर बनाए गए हैं। इन क्लस्टरों में प्राकृतिक खेती को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए 800 कृषि सखियों का चयन किया गया है, जो हर गांव में जाकर किसानों को प्रशिक्षित और जागरूक कर रही हैं। इस कार्यशाला में राज्य भर से आए प्रगतिशील किसानों और कृषि सखियों ने भाग लिया, जहां उन्हें प्राकृतिक खाद बनाने और कीट प्रबंधन के गुर सिखाए गए।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *