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क्या गिर जाएगा ममता का ‘अभेद्य दुर्ग’? भवानीपुर में पिछड़ीं दीदी, शुभेंदु अधिकारी की रणनीति ने बदला बंगाल का भूगोल; जानें अधिकारी का पूरा सफर

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। सबसे बड़ा उलटफेर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर में देखने को मिल रहा है, जहाँ वह शुरुआती राउंड की मतगणना में पीछे चल रही हैं। इस चुनावी समर के सबसे बड़े नायक के रूप में शुभेंदु अधिकारी उभरकर सामने आए हैं।

शुभेंदु अधिकारी बंगाल की राजनीति का वह चेहरा हैं जिन्हें ‘जमीनी नेता’ माना जाता है। पूर्वी मिदनापुर के कद्दावर राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले शुभेंदु, कभी ममता बनर्जी के सबसे खास सिपहसालार हुआ करते थे। नंदीग्राम आंदोलन (2007) में ममता बनर्जी को सत्ता की दहलीज तक पहुँचाने में शुभेंदु की भूमिका निर्णायक थी। उनके पिता शिशिर अधिकारी भी राजनीति के पुराने दिग्गज रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक ग्राफ बहुत ही प्रभावशाली रहा है:

  • नंदीग्राम के नायक: उन्होंने 2007 में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ नंदीग्राम आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसने बंगाल में 34 साल के वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका।
  • संसदीय और विधायी अनुभव: शुभेंदु लोकसभा सांसद और ममता कैबिनेट में परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं।
  • भाजपा में आगमन: दिसंबर 2020 में, ममता बनर्जी से मतभेदों के बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
  • नंदीग्राम 2021 की जीत: पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी पूर्व नेता ममता बनर्जी को नंदीग्राम की ऐतिहासिक लड़ाई में हराकर खुद को ‘जायंट किलर’ साबित किया था।

ममता बनर्जी का भवानीपुर जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली सीट पर पीछे होना केवल एक चुनावी आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश की ओर इशारा करता है:

  1. गढ़ में सेंध: भवानीपुर ममता बनर्जी का गृह क्षेत्र और पारंपरिक गढ़ रहा है। यहाँ पिछड़ने का मतलब है कि भाजपा का ‘ध्रुवीकरण’ और ‘सत्ता विरोधी’ नैरेटिव शहरी मतदाताओं के बीच भी काम कर रहा है।
  2. शुभेंदु का बढ़ता कद: शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल में भाजपा को वह चेहरा दिया जो सीधे ममता बनर्जी की शैली में ही उन्हें चुनौती दे सकता है। उनकी रणनीति ने ममता को अपने ही क्षेत्र में रक्षात्मक होने पर मजबूर कर दिया है।
  3. संगठनात्मक विफलता: टीएमसी के लिए यह इस बात का संकेत है कि कोलकाता जैसे उनके मजबूत केंद्रों में भी मतदाताओं का भरोसा डगमगाया है।

रुझानों में भाजपा 148 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है। यह जीत शुभेंदु अधिकारी की उस भविष्यवाणी को सच साबित करती दिख रही है, जिसमें उन्होंने बंगाल में ‘परिवर्तन’ का दावा किया था। याद दिला दें कि 2021 के चुनाव में भाजपा को केवल 77 सीटें मिली थीं, जबकि इस बार वे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाते दिख रहे हैं।

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