why is the voice of hind rajab banned in india

‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’…भारत में क्यों बैन है ऑस्कर नाॅमिनेटेंड ये फिल्म, क्यों हो रही राजनीति?

इजरायल-गाजा युद्ध की त्रासदी को बयां करती ऑस्कर नामांकित डॉक्यूमेंट्री ‘द वॉइस ऑफ हिंद रजब’ इन दिनों भारत में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। फिल्म की थिएटर रिलीज को लेकर जारी विवाद पर अब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि सरकार को फिल्म बैन करने जैसे फैसलों की समीक्षा करनी चाहिए।

यह डॉक्यूमेंट्री 6 साल की एक फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब की वास्तविक और अत्यंत हृदयविदारक कहानी पर आधारित है।

  • घटना: जनवरी 2024 में गाजा युद्ध के दौरान हिंद रजब अपने परिवार के साथ कार में भाग रही थी, तभी उनकी कार पर हमला हुआ। परिवार के सभी सदस्य मारे गए और मासूम हिंद घंटों तक अपनी जान बचाने के लिए रेड क्रेसेंट (Red Crescent) के बचाव कर्मियों को फोन पर गुहार लगाती रही।
  • मार्मिक अंत: 12 दिनों के बाद हिंद रजब का शव उसी कार से बरामद हुआ। यह फिल्म उस मासूम की आखिरी आवाज और युद्ध की विभीषिका को पूरी दुनिया के सामने लाती है।

चूंकि यह एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म है, इसलिए इसमें कोई पेशेवर अभिनेता या अभिनेत्री (कास्ट) नहीं हैं। इसमें वास्तविक फुटेज, कॉल रिकॉर्डिंग्स और प्रत्यक्षदर्शियों के साक्षात्कारों का उपयोग किया गया है।

  • निर्देशक: इस फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता नेजाद अंदानी (Nejad Andani) और उनकी टीम ने किया है।
  • निर्माता: इसे अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं के एक समूह ने तैयार किया है, जिसका उद्देश्य युद्ध के मानवीय पक्ष को दिखाना है।

भारत में इस फिल्म की स्क्रीनिंग को लेकर मुख्य रूप से दो कारण बताए जा रहे हैं:

  1. डिप्लोमैटिक रिश्ते: आलोचकों और सरकार के कुछ हलकों का मानना है कि इस फिल्म का प्रदर्शन भारत और इजरायल के बीच के कूटनीतिक संबंधों पर असर डाल सकता है।
  2. सुरक्षा और कानून: फिल्म को ‘प्रोपगेंडा’ बताते हुए कुछ संगठनों ने इसका विरोध किया है, जिसके आधार पर कानून व्यवस्था का हवाला देकर इसकी रिलीज में अड़चनें पैदा की जा रही हैं।

शशि थरूर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “फिल्म देखना भारतीयों का लोकतांत्रिक हक है। भारत सरकार ने यह फिल्म नहीं बनाई है और न ही इसे स्पॉन्सर कर रही है, तो इसे बैन क्यों किया जा रहा है? जिस कानून के तहत यह प्रतिबंध लगाया गया है, उसका रिव्यू होना चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म संभवतः इजरायल में भी बैन नहीं है।”द वॉइस ऑफ हिंद रजब केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि युद्ध के बीच दबी एक मासूम की चीख है। भारत में इसके प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अभिव्यक्ति की आजादी बनाम कूटनीति की एक नई बहस को जन्म दे चुका है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *