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नेपाल का सीमांचल कनेक्शन! इंडो-नेपाल बॉडर पर सुरक्षा के लिए एक्शन प्लान तैयार, जानिए मई में क्या होगा

भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए केंद्र सरकार अब ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अगले महीने की 2 मई को दिल्ली स्थित गृह मंत्रालय (MHA) में एक हाई-प्रोफाइल बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक का एकमात्र उद्देश्य इंडो-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाना और सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को पूरी तरह से ठप करना है।

दिल्ली में होने वाली इस अहम बैठक में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहेंगे। इसके अलावा, सीमांचल की जमीनी हकीकत को बैठक की मेज तक पहुंचाने के लिए पूर्णिया रेंज के आयुक्त और IG विवेकानंद सहित सीमांचल के सभी जिलों के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। सूत्रों की मानें तो बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इस बैठक में डिजिटल माध्यम से जुड़कर राज्य सरकार का पक्ष रख सकते हैं।

गृह मंत्री के साथ होने वाली इस महा-बैठक से पूर्व बिहार का प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया है। कल (मंगलवार) मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और DGP विनय कुमार खुद सीमांचल के सीमावर्ती इलाकों का दौरा करने के लिए रवाना होंगे। वे इंडो-नेपाल बॉर्डर के संवेदनशील इलाकों की जमीनी समीक्षा करेंगे। इस दौरे का मुख्य मकसद सुरक्षा की मौजूदा खामियों को पहचानना और एक ठोस ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार करना है, जिसे दिल्ली में अमित शाह के सामने पेश किया जाएगा।

इस उच्च स्तरीय बैठक के एजेंडे में तीन प्रमुख बिंदु शामिल हैं:

  1. घुसपैठ पर नकेल: बांग्लादेश के रास्ते होने वाली अवैध घुसपैठ और राष्ट्रविरोधी तत्वों की आवाजाही पर पैनी नजर रखना।
  2. तस्करी पर वार: सीमा पार से होने वाली मादक पदार्थों (Drugs) और हथियारों की तस्करी के सिंडिकेट को ध्वस्त करना।
  3. पुख्ता निगरानी: सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास और आधुनिक तकनीक से निगरानी बढ़ाना।

सीमांचल के जिलों (पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, और कटिहार) के लिए यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल के दिनों में सीमा सुरक्षा को लेकर कई तरह की रिपोर्ट सामने आई हैं। अब केंद्र और राज्य सरकार की इस साझा मुस्तैदी से सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद है।

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