डेस्क।न्यूजस्टिच
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और इजराइल के रिश्तों को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए एक बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के खिलाफ उनके कड़े रुख या युद्ध जैसी स्थितियों के पीछे इजराइल का कोई दबाव नहीं था। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी एक पोस्ट में ट्रंप ने उन कारणों का खुलासा किया है, जिन्होंने उन्हें ईरान के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर मजबूर किया।
इजराइल नहीं, ये हैं वो दो बड़ी वजहें
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि इजराइल ने मुझे ईरान के साथ युद्ध के लिए कभी राजी नहीं किया। उन्होंने इसके लिए दो प्रमुख कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। ट्रंप के अनुसार इजराइल पर हुए 7 अक्टूबर के आतंकी हमलों ने स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। ट्रंप ने दोहराया कि उनका यह आजीवन विश्वास रहा है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। इन दो वजहों ने ही उनके वर्तमान रुख को तय किया है।
अमेरिकी मीडिया और चुनाव पर बड़ा हमला
हमेशा की तरह ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया और ओपिनियन पोल्स को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मैं फेक न्यूज पंडितों और सर्वेक्षणों को पूरी तरह से अविश्वास के साथ देखता और पढ़ता हूं। वे जो कहते हैं उसका 90% झूठ और मनगढ़ंत कहानियां होती हैं। उन्होंने एक बार फिर 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को रिग्ड (धांधली वाला) करार दिया और इसकी तुलना वेनेजुएला के चुनाव परिणामों से की।

ईरान में सत्ता परिवर्तन का संकेत
ट्रंप का सबसे चौंकाने वाला बयान ईरान के नेतृत्व को लेकर आया। उन्होंने खुले तौर पर ‘रेजइम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन का संकेत देते हुए कहा कि यदि ईरान के नए नेता समझदार होते हैं, तो ईरान का भविष्य बहुत ही समृद्ध और महान हो सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है और दुनिया की नजरें अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं।
ग्लोबल राजनीति पर असर
ट्रंप के इस बयान से यह साफ है कि आने वाले समय में अमेरिका, ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव और अधिक बढ़ा सकता है। उन्होंने वेनेजुएला का जिक्र कर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वे उन देशों में लोकतांत्रिक बदलाव या नेतृत्व परिवर्तन के पक्षधर हैं जो अमेरिकी हितों के खिलाफ काम करते हैं।

