गया। न्यूजस्टिच
आपने सुना होगा कि उधार मांगने पर लोग मुंह फेर लेते हैं, या फिर बहाने बनाते हैं। लेकिन बिहार के गया नगर निगम ने तो ‘बदला’ लेने का ऐसा नायाब तरीका निकाला है कि पूरे सूबे में इसकी चर्चा हो रही है। यहाँ एक ठेकेदार को अपना हक यानी 7 महीने का बकाया पैसा मांगना इतना भारी पड़ गया कि निगम के कारिंदों ने उसके घर के मुख्य द्वार को ही डंपिंग यार्ड बना दिया।
दरवाजा खुला तो सामने था ‘नरक’
मामला शहर के एक प्रतिष्ठित ठेकेदार से जुड़ा है, जो लंबे समय से नगर निगम में सफाई और अन्य संसाधनों की आपूर्ति का काम देखते हैं। ठेकेदार का कसूर बस इतना था कि वह पिछले सात महीनों से अपने रुके हुए भुगतान के लिए निगम के दफ्तरों की धूल फाँक रहा था। थक-हारकर जब उसने अधिकारियों पर दबाव बनाया, तो उसे आश्वासन के बजाय ‘कचरे की सौगात’ मिली। सुबह जब घर का दरवाजा खुला, तो सामने बदबू मारते कूड़े का पहाड़ खड़ा था। कचरा गाड़ी से जानबूझकर घर के गेट को ब्लॉक कर दिया गया था।
सिस्टम की ‘गुंडागर्दी’ का वीडियो वायरल
नगर निगम के इस ‘अजीबोगरीब’ कारनामे का वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे सफाई कर्मियों ने अपनी ही गाड़ी से ठेकेदार के घर के ठीक सामने कचरा पलटा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सीधे तौर पर गुंडागर्दी और मानसिक प्रताड़ना है। एक तरफ सरकार स्वच्छता अभियान पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं शहर को साफ रखने का जिम्मा उठाने वाले खुद गंदगी फैलाकर अपनी खुन्नस निकाल रहे हैं।
साहब बोले- जांच होगी!
जैसे ही यह मामला सोशल मीडिया के जरिए नगर आयुक्त और वरीय अधिकारियों तक पहुंचा, विभाग में हड़कंप मच गया। किरकिरी होते देख अब जांच के आदेश दे दिए गए हैं। नगर आयुक्त का कहना है कि यह कृत्य अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या केवल जांच से उस ठेकेदार की मानसिक प्रताड़ना की भरपाई हो पाएगी?

