पूर्णिया। न्यूजस्टिच
सेवा और समर्पण का केंद्र माना जाने वाला पूर्णिया जीएमसीएच एक बार फिर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। हैरान करने वाली बात यह है कि यहां भगवान का दर्जा पाने वाले डॉक्टरों को उस समय उन्मादी भीड़ के गुस्से का शिकार होना पड़ा। जब उन्होंने एक मृत घोषित हो चुके मरीज पर चमत्कार करने से इनकार कर दिया। इस हिंसक हमले में एक महिला डॉक्टर सहित चार चिकित्सक और कई स्वास्थ्य कर्मी लहूलुहान हुए हैं। घटना के बाद से पूरा अस्पताल परिसर पुलिस छावनी बना हुआ है, लेकिन सवाल वही है क्या डॉक्टर अब अस्पताल के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं?
मौत पहले ही हो चुकी थी, पर परिजनों को चाहिए था ‘चमत्कार’
वारदात की शुरुआत जीएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड से हुई। सहायक खजांची थाना क्षेत्र के सुभाष नगर निवासी गुलाब सिंह अपनी 60 वर्षीय पत्नी रीना देवी को लेकर अस्पताल पहुँचे थे। रीना देवी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही थीं और डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल पहुँचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया था। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की टीम ने पूरी संवेदनशीलता दिखाई और पुष्टि के लिए ईसीजी (ECG) भी किया। जैसे ही डॉक्टरों ने आधिकारिक रूप से उन्हें मृत घोषित किया। परिजनों का धैर्य टूट गया। वे डॉक्टरों पर मरीज को जिंदा करने का दबाव बनाने लगे। जब विज्ञान ने हाथ खड़े कर दिए, तो परिजनों ने कानून हाथ में ले लिया।
महिला डॉक्टर से बदसलूकी और जानलेवा हमला
आक्रोशित भीड़ ने ऑन-ड्यूटी महिला डॉक्टर मनीषा कुमारी को निशाना बनाया। उनके साथ न केवल बदसलूकी की गई, बल्कि उन पर हाथ भी उठाया गया। जब साथी इंटर्न डॉक्टर आदर्श कुमार, डॉ.जिनेन्द्र और डॉ. अभिजीत आनंद उन्हें बचाने आए, तो हमलावरों ने उन पर भी बेरहमी से लाठी-डंडे बरसाए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावर अपनी गाड़ियों से हथियार निकालकर लाए थे। उन्होंने इमरजेंसी वार्ड के शीशे और गेट तोड़ दिए, जिससे अस्पताल में भगदड़ मच गई। हमलावर अपनी ‘हिट एंड रन’ साजिश को अंजाम देकर मौके से फरार होने में सफल रहे।
साजिश की बू: क्या निजी क्लिनिकों के दलालों का है हाथ?
इस घटना ने एक नए और गंभीर पहलू को जन्म दिया है। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. विकास कुमार ने इस हमले के पीछे एक गहरी साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने कहा कि जीएमसीएच में हाल के दिनों में कई जटिल ऑपरेशन सफल हुए हैं, जिससे निजी क्लिनिकों के दलाल बौखलाए हुए हैं। सरकारी अस्पताल की साख गिराने और डॉक्टरों का मनोबल तोड़ने के लिए यह एक सुनियोजित हमला हो सकता है।
अधीक्षक का कड़ा रुख: सुरक्षा से समझौता नहीं
अस्पताल अधीक्षक डॉ.संजय कुमार ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि डॉक्टरों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन बदले में उन्हें हिंसा मिली। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और डॉक्टरों पर जानलेवा हमले के आरोप में पुलिस को लिखित आवेदन दे दिया गया है। फिलहाल के. हाट थानाध्यक्ष उदय कुमार और टीओपी प्रभारी राजनंदनी ने मोर्चा संभाल लिया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि फरार हमलावरों को सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

