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क्या पूर्णिया के निजी स्कूलों में देना होगा री-एडमिशन फी? जिलाधिकारी ने किया क्लियर

जिले के निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए प्रशासन ने अब कमर कस ली है। जिलाधिकारी अंशुल कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले के किसी भी निजी विद्यालय में हर साल री-एडमिशन के नाम पर फीस की वसूली नहीं की जाएगी। समाहरणालय में आयोजित शिक्षा विभाग और निजी स्कूल संचालकों की मासिक समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया।

बैठक में जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि एक बार नामांकन होने के बाद छात्रों से प्रतिवर्ष पुनः प्रवेश शुल्क लेना पूरी तरह गलत है। उन्होंने सभी स्कूल संचालकों को निर्देश दिया कि वे इस प्रथा को तुरंत बंद करें। इस फैसले से नए शैक्षणिक सत्र में हजारों अभिभावकों को आर्थिक राहत मिलना तय है।

डीएम ने शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों के नामांकन में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आदेश दिया कि सभी स्कूल अपनी कुल ‘इनटेक कैपेसिटी’ (प्रवेश क्षमता) का ब्यौरा सार्वजनिक करें और नामांकन प्रक्रिया में तेजी लाएं। साथ ही, स्कूलों को सत्र शुरू होने से पहले ही अपना पूरा फीस स्ट्रक्चर पारदर्शी तरीके से अभिभावकों के सामने रखना होगा।

जिलाधिकारी ने स्कूलों द्वारा किसी खास दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के दबाव पर भी संज्ञान लिया। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को किसी विशेष वेंडर के लिए बाध्य नहीं कर सकता। अभिभावक अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार बाजार में कहीं से भी सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं।

जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्कूल इन निर्देशों की अवहेलना करता पाया गया या नियमों के विरुद्ध फीस वसूली की शिकायत मिली, तो संबंधित विद्यालय के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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