ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के 33वें दिन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से पीछे हटने का फैसला महज एक सैन्य कदम नहीं, बल्कि एक गहरी रणनीतिक हार और यथार्थवाद की जीत माना जा रहा है। 1 अप्रैल, 2026 को जारी इस फैसले ने पूरी दुनिया के तेल बाजार और भू-राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
1. जनरल डेन केन की अदृश्य दुश्मन की चेतावनी
57 वर्षीय जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ जनरल डेन केन ने राष्ट्रपति ट्रंप को बंद कमरे में हुई ब्रीफिंग में जो नक्शा दिखाया, उसने युद्ध की दिशा बदल दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केन ने तर्क दिया कि होर्मुज अब एक समुद्री जलमार्ग नहीं, बल्कि एक ईरानी किला बन चुका है।
- असिमेट्रिक वॉरफेयर (Asymmetric Warfare): जनरल केन ने समझाया कि ईरान पारंपरिक युद्ध नहीं लड़ रहा है। उसने होर्मुज की गहराई में ‘सुसाइड डाइवर्स’ और बारूद से लदी छोटी घोस्ट बोट्स का जाल बिछाया है।
- एक नाव बनाम एक युद्धपोत: न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से केन ने चेतावनी दी कि अमेरिका का अरबों डॉलर का विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) ईरान की महज कुछ हजार डॉलर की कामिकाजे नाव से तबाह हो सकता है। यहाँ ताकत नहीं, बल्कि चालाकी हावी है।
2. ट्रंप का नया नियम: तेल तुम्हारा, रिस्क भी तुम्हारा
जनरल केन की सलाह के बाद ट्रंप ने एक बड़ा जुआ खेला है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका अब दुनिया का ‘पुलिसवाला’ बनकर दूसरों के तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अपने सैनिकों की जान जोखिम में नहीं डालेगा।
- एशियाई देशों पर दबाव: ट्रंप का सीधा इशारा उन देशों की ओर है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज पर निर्भर हैं। ट्रंप ने कहा, जिन्हें तेल चाहिए, वे खुद अपनी सेना भेजें और अपने जहाजों की रक्षा करें।
- रणनीतिक अलगाववाद: यह कदम ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का चरम बिंदु है, जहाँ वे अमेरिका को मध्य-पूर्व के खर्चों से पूरी तरह मुक्त करना चाहते हैं।
3. व्हाइट हाउस की अंदरूनी जंग: हॉक्स बनाम रियलिस्ट
इस फैसले के पीछे व्हाइट हाउस के भीतर चल रही खींचतान भी एक बड़ा कारण है। शुरुआत में स्टीव विटकॉफ और पीट हेगसेथ जैसे कड़े रुख वाले सलाहकारों ने ट्रंप को ईरान पर सीधी चढ़ाई के लिए प्रेरित किया था। लेकिन युद्ध के एक महीने बाद, जब हताहतों की संख्या बढ़ी, तो जनरल केन जैसे ‘रियलिस्ट’ (यथार्थवादी) गुट की बात सुनी गई।
4. होर्मुज: एक अभेद्य चुनौती
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने होर्मुज के किनारों पर अपनी मिसाइल बैटरियों और ड्रोन ठिकानों को इतनी कुशलता से छिपाया है कि उन्हें ‘पिन-पॉइंट’ स्ट्राइक से खत्म करना लगभग असंभव है। जनरल केन का मानना है कि यहाँ जीत का कोई रास्ता नहीं है, सिर्फ ‘अंतहीन नुकसान’ है।
एक नई वैश्विक व्यवस्था?
होर्मुज से अमेरिका का पीछे हटना ईरान के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य जीत है। जनरल डेन केन ने अपनी सूझबूझ से अमेरिका को एक ऐसी संभावित त्रासदी से बचा लिया है जो वियतनाम या इराक से भी बड़ी हो सकती थी। अब गेंद भारत, चीन और यूरोपीय देशों के पाले में है-क्या वे इस ईरानी किले में घुसने की हिम्मत करेंगे या तेहरान की शर्तों पर समझौता?

