VIP प्रमुख मुकेश सहनी ने पप्पू सहनी की मौत को पुलिस की सोची-समझी साजिश बताया है।

Muzaffarpur: मुकेश सहनी ने घेरा SSP दफ्तर, पप्पू सहनी एनकाउंटर को बताया फर्जी, जानिए कौन था पप्पू सहनी

उत्तर बिहार की व्यावसायिक राजधानी मुजफ्फरपुर में आज सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया जब विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी भारी समर्थकों के साथ एसएसपी कार्यालय का घेराव करने पहुंच गए। मामला बीते महीने हुए कुख्यात साइबर अपराधी पप्पू सहनी के एनकाउंटर से जुड़ा है। सन ऑफ मल्लाह ने इस मुठभेड़ को पूरी तरह फर्जी करार देते हुए पुलिस प्रशासन को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है।

मुकेश सहनी ने एसएसपी कार्यालय के बाहर गरजते हुए कहा कि पुलिस अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए निर्दोषों का एनकाउंटर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पप्पू सहनी की मौत कोई मुठभेड़ नहीं, बल्कि पुलिस की सोची-समझी साजिश है। सहनी ने मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि एक महीने के भीतर सच्चाई सामने नहीं आई, तो वे पूरे प्रदेश में आंदोलन करेंगे।

पप्पू सहनी का नाम सामने आते ही पुलिस और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। वह मुजफ्फरपुर के मीनापुर इलाके के कांटी मधुबन का रहने वाला था। उसका गहरा राजनीतिक जुड़ाव भी था। उसके पिता आरजेडी के प्रखंड अध्यक्ष हैं। पप्पू सहनी पर मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों में 13 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज थे।

पप्पू सहनी सिर्फ एक अपराधी नहीं, बल्कि एक शातिर मास्टरमाइंड था। उसने झारखंड के जामताड़ा की तर्ज पर मुजफ्फरपुर के कांटी मधुबन इलाके को साइबर अपराध की राजधानी बना दिया था। उसका बड़ा नेटवर्क था। उसने बेरोजगार युवाओं को लालच देकर 200 से 300 लड़कों की एक बड़ी गैंग खड़ी की थी। एटीएम क्लोनिंग, डेबिट कार्ड स्कैनिंग और फिशिंग के जरिए उसने करोड़ों रुपये की काली कमाई की थी। 6 साल पहले जब पुलिस ने उसके घर छापा मारा था, तब लाखों की नकदी और सैकड़ों एटीएम कार्ड मिले थे। उसने बैंक ऑफ इंडिया की सकरा शाखा के दर्जनों ग्राहकों के खाते पलक झपकते साफ कर दिए थे।

पप्पू सहनी का दुस्साहस इस कदर था कि वह पुलिस पर हमला करने से कभी नहीं हिचका। उसने पहले भी ब्रह्मपुरा पुलिस पर फायरिंग की थी। बीते महीने बेला थाना क्षेत्र में जब पुलिस उसे पकड़ने गई, तो उसने फिर से पुलिस टीम पर गोली चला दी थी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने फायरिंग की थी। जिसमें घायल होने के बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

एक तरफ पुलिस पप्पू सहनी को एक बड़ा खतरा और शातिर अपराधी मानती रही है, वहीं मुकेश सहनी द्वारा इसे फर्जी बताना मामले को राजनीतिक रंग दे रहा है। कांटी मधुबन इलाके में पिछले 3 सालों में 1000 से अधिक साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज हुए हैं। जिससे यह स्पष्ट है कि पप्पू का नेटवर्क कितना गहरा था। अब देखना यह है कि मुकेश सहनी के अल्टीमेटम के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है।

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