पटना डेस्क। न्यूजस्टिच
बिहार में अवैध हथियारों की तस्करी के एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा और राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यान एनआईए ने बुधवार को 2024 के बहुचर्चित बिहार अवैध हथियार तस्करी मामले में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुजफ्फरपुर के निवासी कुंदन कुमार उर्फ कुंदन भगत के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है। पटना स्थित NIA की विशेष अदालत में पेश की गई इस चार्जशीट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार के अपराधी और नक्सली अब केवल देसी कट्टों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि उनके तार पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिबंधित हथियारों के सौदागरों से जुड़ चुके हैं।
AK-47 की बरामदगी ने हिलाया था तंत्र
इस पूरे मामले की जड़ें साल 2024 में बिहार पुलिस की एक कार्रवाई में छिपी हैं। पुलिस ने छापेमारी के दौरान एक अत्याधुनिक AK-47 राइफल और एक हाई-टेक लेंस बरामद किया था। सामान्य आपराधिक मामलों में इस तरह के युद्ध स्तर के हथियारों का मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे की घंटी थी। मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय व अंतरराज्यीय कनेक्शन को देखते हुए जांच की कमान NIA को सौंपी गई।
कुंदन भगत सिंडिकेट का अहम ‘लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट’
जांच में सामने आया है कि मुजफ्फरपुर का कुंदन कुमार महज एक कूरियर नहीं था, बल्कि वह नागालैंड से बिहार तक हथियारों की तस्करी करने वाले गिरोह का एक मुख्य स्तंभ था। NIA ने उसे नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। चार्जशीट के अनुसार कुंदन नागालैंड से प्रतिबंधित बोर के हथियारों की अवैध खरीद और उन्हें सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने में सक्रिय था। ये हथियार कोई साधारण रिवॉल्वर या पिस्तौल नहीं, बल्कि मिलिट्री ग्रेड के हथियार थे, जिनका इस्तेमाल नक्सली सुरक्षा बलों के खिलाफ और अपराधी बड़ी गैंगवार में करने की योजना बना रहे थे।
क्रमवार कार्रवाई और अब तक की चार्जशीट
NIA ने इस मामले की परतों को बेहद पेशेवर तरीके से खोला है। कुंदन इस मामले में चार्जशीट किया जाने वाला छठा मुख्य आरोपी है। इससे पहले की कानूनी कार्रवाई इस प्रकार रही है। मई 2025 में एजेंसी ने चार आरोपियों विकास कुमार, देवमणि राय, सत्यम कुमार और अहमद अंसारी के खिलाफ पहली चार्जशीट पेश की थी। फरवरी 2026 में पांचवें आरोपी मंजूर खान पर आरोप पत्र दाखिल कर उसके आतंकी कनेक्शन खंगाले गए। अप्रैल 2026 में अब कुंदन कुमार पर IPC, आर्म्स एक्ट और कड़े गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
नक्सली और अपराधियों का नापाक गठजोड़
NIA की जांच का सबसे डरावना पहलू यह है कि ये हथियार सीधे तौर पर प्रतिबंधित नक्सली संगठनों और बिहार के संगठित अपराध गिरोहों को सप्लाई किए जा रहे थे। नागालैंड से बिहार तक हथियारों को लाने के लिए संभवतः गुप्त रास्तों और फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया गया था। कुंदन कुमार की भूमिका इस पूरे रूट को ‘क्लियर’ रखने और फंड्स के लेन-देन को मैनेज करने की थी।
अभियान अभी जारी है
भले ही छह मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कसा जा चुका है, लेकिन आतंकवाद विरोधी एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि यह केवल ‘हिमशैल का सिरा’ (Tip of the iceberg) है। एजेंसी अब उन ‘बैक-एंड’ फाइनेंसरों और नागालैंड में बैठे उन बड़े आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रही है, जो भारतीय सीमा के भीतर हथियारों की इस अवैध मंडी को चला रहे हैं। NIA का लक्ष्य इस पूरे ‘वेपन सिंडिकेट’ को जड़ से उखाड़ना है ताकि भविष्य में बिहार की धरती पर एके-47 जैसी गर्जना सुनाई न दे।

